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अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: विशेष

मानव जीवन में भाषा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि इसी के माध्यम से दूरदराज के देशों तक संवाद स्थापित किया जा सकता है इसीलिए आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर हम कुछ स्पेशल लिखना चाह रहे हैं,

भाषा के महत्व को देखते हुए वैश्विक स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति व बौद्धिक विरासत की रक्षा करने भाषाएं व सांस्कृतिक विविधता व बहुभाषावाद का प्रचार करने और दुनिया भर के विभिन्न मार्च भाषाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा उनके संरक्षण के लिए यूनेस्को हर साल 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाता है दरअसल भाषा और बहुभाषावाद से समावेशी विकास सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करना आसान हो सकता है मातृभाषा की मदद से न केवल क्षेत्रीय भाषाओं के बारे में जानने समझने में सहायता मिलती है बल्कि एक-दूसरे से बातचीत करना भी आसान हो जाता है यही वजह है कि भाषा की विविधता को विस्तार से जानने के लिए कई देशों ने इस विषय पर मिलकर काम करने का निर्णय लिया है जिसके तहत एक क्षेत्र का व्यक्ति किसी दूसरे क्षेत्र के व्यक्ति की मातृभाषा को न केवल जान पाएगा बल्कि उसे सीट भी सकेगा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा के अवसर पर दुनिया में भाषा व संस्कृति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते साथ ही साथ किसी भी भाषा को सुगम बनाने के लिए परामर्श भी दिए जाते हैं इस महत्वपूर्ण दिवस के लिए यूनेस्को की ओर से हर साल एक टीम निर्धारित की जाती है,

2022 के अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की थीम में बहुभाषी शिक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग चुनौतियां और अवसर संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2019 को स्वदेशी भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित किया गया था 2022 से 2023 के बीच की अवधि को संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वदेशी भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय दशक के रूप में नामित किया गया है यूनेस्को की ओर से मातृभाषा दिवस मनाने की घोषणा 17 नवंबर सन 1919 को की गई थी पहली बार वर्ष 2000 में इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया गया फरवरी को ही यह दिवस मनाए जाने का सुझाव कनाडा में रहने वाले बांग्लादेशी रफीकुल इस्लाम द्वारा किया गया था जिन्होंने बांग्ला भाषा के आंदोलन के दौरान 1952 में प्रस्तावित किया था। ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों व सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी मातृभाषा का अस्तित्व बनाए रखने के लिए एक बड़ा आंदोलन किया गया था तत्कालीन पाकिस्तान सरकार द्वारा आंदोलन को कुचलने के लिए प्रदर्शनकारियों पर गोली चलवा दी गई थी जिससे वह आंदोलन एक भयानक नरसंहार में तब्दील हो गया था जिससे 16 लोगों की मौत हो गई भाषा के इस बड़े आंदोलन में शहीद युवाओं के समिति में यूनेस्को द्वारा वर्ष 1999 में निर्णय लिया गया कि प्रतिवर्ष 21 फरवरी को दुनिया भर में मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाएगा संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में बोली जाने वाली 6900 भाषाएं हैं और इनमें से 90% भाषाएं बोलने वाले लोग एक लाख से भी कम है लेकिन चिंता की बात यह है कि दुनिया भर में बोली जाने वाली भाषाओं में से करीब 83 भाषाएं संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2 हफ्ते में एक भाषा गायब होती और दुनिया पूरी सांस्कृतिक विरासत को देती है आज विश्व में सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा में अंग्रेजी जापानी जापानी इत्यादि शामिल है संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक केवल भाषा को ही शिक्षा प्रणाली और सार्वजनिक क्षेत्रों में जगह मिली है और वैश्विक आबादी के करीब 40 लोगों ने ऐसी भाषा में शिक्षा प्राप्त नहीं की जिससे वह बोलते अथवा समझते हैं डिजिटल दुनिया में वैश्विक स्तर पर 100 से भी कम भाषाओं का उपयोग किया जाता है।

वैश्वीकरण के इस दौर में बेहतर रोजगार के अवसरों के लिए विदेशी भाषा सीखने की ओर मार्च भाषाओं के लुप्त होने के पीछे एक प्रमुख कारण माना जाता है हालांकि आज भारत सहित कई बड़े देशों में भाषा को सरल एवं सुगम बनाने के लिए ढेरों योजनाएं तैयार की जा रही है छात्रों को विभिन्न भाषाओं की जानकारी मिल सके इस उद्देश्य से कई विश्वविद्यालय में भाषा को लेकर नए कोर्स भी तैयार किए जा रहे लेकिन वैश्विक भाषाओं के संरक्षण के लिए गंभीर वैश्विक प्रयासों की सख्त दरकार है दरअसल प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देने से या छात्रों को उनकी पसंद के विषय अथवा भाषा को सशक्त बनाने में मददगार होगा या भारत में बहुभाषी समाज के निर्माण नहीं भाषा को सीखने की क्षमता इत्यादि में भी मदद करेगा बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाए जाने का मूल उद्देश्य ही है कि दुनियाभर ना सिर्फ विश्व की सभी भाषाओं का सम्मान हो बल्कि लुप्त होती मातृ भाषाओं के संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास भी किए जाए।

जय हिंद

Annie Sharma

Writer, Social blogger, data analyst (worked under NGO related to niti aayog for 3years &self )

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